बचपन की चोटों और दुर्घटनाओं के लिए प्राथमिक चिकित्सा

Updated: Sep 18


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बच्चे हमेशा इधर-उधर भागते रहते हैं, दुनिया कि खोज करते हैं, जिससे वे दुर्घटनाओं, चोटों और ज़हर के शिकार होते हैं। अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों में कम से कम मामूली चोट या जलन का अनुभव करते हैं। यह ज़रूरी है कि हर कोई प्रभावी प्राथमिक चिकित्सा कौशल के बारे में अच्छी तरह से जानता हो। सभी को प्राथमिक चिकित्सा के दौरान होने वाले सामान्य गलतियों से बारे में भी पता होना चाहिए ताकि उनसे बचा जा सके। यह भी पता होना आवस्यक है कि कब हालत गंभीर है ताकि तुरंत अस्पताल ले जा सके । इस लेख के दो भाग हैं, पहला भाग सामान्य बचपन की चोटों से सम्बंधित है, दूसरा भाग बचपन की चिकित्सा आपात स्थिति और विषाक्तता है जो अगली लेख में आएगा ।

हमेशा क्या करना है?

1. शांत रहें-एक बच्चे को आपात स्थितियों में देखकर किसी को भी डर लगता है, माता-पिता के लिए यह अनुभव और भी भयानक है । चोट को बढ्ने से रोकने के लिए और प्रभावी प्राथमिक उपचार करने के लिए शांत रहना आवश्यक है।

2. घटनास्थल की अछि तरह से जांच करें-दौड़ें नहीं, धीरे-धीरे आगे बढ़े ताकि कोई भी खतरा आगे ही पता चले। उदाहरण के लिए, वाहन दुर्घटना के मामले में, अगर इंजिन चालू है तो उसे पहले बंद करना सबसे महत्त्वपूर्ण बात है, ताकि और नुकसान न हो।

3. पहले ख़ुद को सुरक्षित रखें-हालाँकि यह स्वार्थी लग सकता है, आपको प्राथमिक उपचार देने के लिए ये आवश्यक है। एक बीमार बच्चे को अस्पताल ले जाना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है, अगर एक और व्यक्ति को चोट लग जाए तो वह दूसरों के लिए बोझ बन जाता है।

4. दूसरों की मदद के लिए पुकारे- अगर आस-पास कोई नहीं है, तो आपको फ़ोन से मदद मांगनी चाहिए।

कटने- छिलने के घाव


क्या करें?

यदि खून बह रहा है तो दिल के स्तर से ऊपर रक्तस्राव अंग को उठाएँ और कम से कम 15 मिनट के लिए निरंतर चोट पर दबाव दें। यदि उपलब्ध हो तो, दबाव के लिए साफ़ कपड़े का उपयोग करें। । जब खून बहना बंद हो जाए, बहती पानी में चोट को धोएँ। उसके बाद एंटीसेप्टिक लगाएँ।

क्या नहीं करें?

घाव पर यदि कील, पत्थर जैसे बाहरी वस्तु पड़ा है तो उन्हें निकालने का प्रयास न करें।

1. गाय के गोबर, पत्ते, हल्दी, मक्खन जैसे घरेलू उपचार घाव पर ना लगाएँ। इनसे संक्रमण हो सकता है।

2. यदि बच्चा उम्र के लिए पूरी तरह से प्रतिरक्षित है और पिछले 10 वर्षों में टीटी की कम से कम एक खुराक प्राप्त की है, तो फिर से टीटी का प्रशासन करने की कोई आवश्यकता नहीं है। दस वर्षों में केवल एक बार टीटी की आवश्यकता होती है प्रत्येक 6 महीने में नहीं (जो एक लोकप्रिय विश्वास है)। आवश्यकता से अधिक टीटी का प्रशासन करने से एलर्जी हो सकती है। टीटी टेटनस को रोकने के लिए है, इससे घाव के संक्रमण को रोका नहीं जा सकता। घाव का संक्रामण घाव की ढुलाई और एंटीसेप्टिक से होता है।


अस्पताल कब ले जाना है?

1. घाव पर यदि बाहरी वस्तु पड़ा हो

2. यदि रक्तस्राव बंद नहीं हो रहा

3. घाव बड़ा है या दर्द गंभीर है

4. अगर टीटी की ज़रूरत है

5. चेहरे पर घाव

6. यदि गहरे ऊतकों, स्नायुबंधन या हड्डी दिख रहा है

ऐसे परिस्थिति में  बच्चे को जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना आणिवर्य है।

जलन

क्या करें?

घाव को ठंडे पानी से धोए 10 से 15 मिनट तक धोये और साफ़ कपड़े या पट्टी से ढक दें।


क्या नहीं करें ?

1. बर्फ का उपयोग न करें, यह जले हुए स्थान पर रक्त की आपूर्ति को बाधित करता है और घाव देरी से भरता है ।

2. घरेलू उपचार न करें ।

अस्पताल कब ले जाना है?

1. दर्द गंभीर है

2. अगर टीटी की ज़रूरत है

3. चेहरे में जलन

4. अगर जलन धुएँ भरे बंद कमरे में हुआ हैं

जलने का आकार बच्चे की हथेली


नकसीर

अक्सर यह बच्चों में अनायास होता है, कभी-कभी चोट के बाद भी हो सकता है।

क्या करें?


बच्चे एक कुर्सी पर बिठाये, और उसे थोड़ा आगे झुकाकर और कम से कम 15 मिनट के लिए नाक के नरम हिस्से को चुटकी से दबाएँ ।

क्या नहीं करें ?

1. बच्चे को न लिटाएँ या पीछे की तरफ झुकाएँ (आमतौर पर की गई गलती) इससे रक्त गले की तरफ़ जाता है और रुकता नहीं है ।

2. नाक के सख्त हिस्से को न दबाएँ । नाक के नरम हिस्से की आंतरिक सतह में रक्त वाहिकाओं से रक्तस्राव होता है। नरम भाग की चुटकी लेना ही प्रभावी होता है।

3. उसकी नाक में पत्ते, टिशू या रुई न डालें ।

अस्पताल कब ले जाना है?

1. यदि बच्चा गिर गया है और नाक असामान्य आकार की लग रही है।

2. रक्तस्राव बार- बार होना ।

3. अन्य अंगों से रक्तस्राव का वर्तमान या पिछला इतिहास (बाहरी रोगी विभाग को दिखाया जा सकता है, आपातकालीन नहीं)

सिर में चोट या टक्कर

यदि केवल थोड़ी-सी सूजन है और बच्चा अन्यथा हंस - खेल रहा है, तो केवल बर्फ लगाना पर्याप्त है। निम्न में से कोई भी संकेत होने पर बच्चे को तुरंत अस्पताल (आपातकालीन विभाग) में ले आएँ

1. गंभीर सिरदर्द

2. उल्टी

3. बेहोश होना, (थोड़ी देर के लिए भी)

4. अत्यधिक नींद आना

5. माता-पिता को पहचानने में सक्षम नहीं


6. दौरा आना

7. कान, नाक या मुंह से खून आना

8. किसी भी अंग को कम हिला पाना (विपरीत अंग की तुलना में)

9. गर्दन में चोट

कुत्ता (और अन्य स्तनपायी) का काटना

क्या करें?

कम से कम 10 मिनट साबुन -पानी से नल के नीचे धोएँ। (यह सबसे ज़रूरी क़दम है) । घाव पर एक एंटीसेप्टिक लगा सकते हैं ।

क्या नहीं करें ?

1. रेबीज वायरस को निकालने की चक्कर में घाव को बहाने की कोशिश न करें।

2. टीकाकरण में देरी न करें । अगर कुत्ता पालतू है या टीका का लगाया हुआ है, तब भी टीकाकरण आवशयक है । रेबीज, अगर होता है, तो 100% मृत्यु दर के साथ एक गंभीर बीमारी है।


अस्पताल कब ले जाना है?

सभी कुत्ते को काटने पर (और अन्य स्तनपायी जानवरों के काटने पर भी), रेबीज वैक्सीन के 5 खुराकों के टीके लगाया जाना चाहिए। यदि कुत्ता  किसी  घाव पर चाट रहा हो या बिना खून भए खरोच हो,  तब  केवल टीकाकरण  काफ़ी है। यदि काटने के कारण रक्तस्राव होता है, तो एंटी-रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की भी आवश्यकता होती है। वैक्सीन की खुराक 0, 3, 7, 14, 28 दिनों में दी जाती है। यदि बच्चे को पहले से ही वैक्सीन का पूरा कोर्स मिल चुका है पिछली बार काटने के कारण, तो केवल तीन खुराक ही पर्याप्त हैं और कोई इम्युनोग्लोबुलिन की ज़रूरत नहीं है । कुत्ते के काटने पर भी  टीटी की आवश्यकता होती है, किसी अन्य घाव की तरह ।


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