बच्चों में खिलाने की समस्याएं (आपके बच्चे के खाने केआदतों को सुधारने के लिए सामान्य से विपरीत तरीके)

Updated: 2 days ago


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बच्चों में भोजन कराने की समस्या (जिसे पिकी, चॉसी, फस्सी या फैडी ईटिंग भी कहा जाता है) एक सामान्य स्थिति है। लगभग 50% बच्चों को कभी न कभी भोजन कराने की समस्या होती है। ये बच्चे कम खाते हैं, धीरे-धीरे खाते हैं और भोजन के प्रति कम रुचि लेते हैं। वे सीमित प्रकार के खाद्य पदार्थ खाते हैं, नए प्रकार के खाद्य पदार्थों में अनिच्छा, सब्जियों और फलों का सीमित सेवन और सक्थ खाद्य वरीयताओं को प्रदर्शित करतें हैं। यह लड़कों और लड़कियों में समान रूप में देखा जाता है और मध्य और उच्च सामाजिक वर्ग में होने की अधिक संभावना है। यह परिवारों में भी चल सकता है। खाद्य परेशानी आमतौर पर भविष्य में स्वास्थ्य, विकास या सामाजिक समस्याओं का कारण नहीं बनता। खाद्य गड़बड़ वाले बच्चे की अन्य बच्चों की तुलना में उतनी ही ऊंचाई और वजन होती है। हालांकि, फल और सब्जियों के कम सेवन के परिणामस्वरूप उनमें कब्ज हो सकता है। ध्यान दें कि मैंने "से बीमार" के बजाय "स्थिति " सब्द को चुना है क्योंकि ज्यादातर यह विकास का एक सामान्य हिस्सा है। जब ये छोटे बच्चे चार- पांच साल के हो जातें हैं, आम तौर पर भोजन में उनकी रूचि बढ़ जाती है।

भोजन में परेशानी के कारण (क्यों आपका बच्चा कुछ भी नहीं खाता?)

बच्चों में भोजन में परेशानी के कारण जटिल हैं और इनमें खराब भोजन की गुणवत्ता, परिवार के अनुचित खान-पान के व्यवहार, खाद्य विविधता की कमी और पारिवारिक या सामाजिक वातावरण शामिल हैं। हर बच्चे में, एक से अधिक कारण होते हैं, और प्रत्येक बच्चे में निम्न में से सभी नहीं भी हो सकता हैं

1. धीमी वृद्धि दर- शैशवावस्था में तीव्र वृद्धि अवधि के बाद (पहले 1 वर्ष)। विकास दर धीमी हो जाती है। यह टॉडलरहुड में कम से कम है (हालांकि वृद्धि और भोजन सेवन की मात्रा के लिए परिवार की उम्मीद बढ़ जाती है)।

2. भावनात्मक उथल पुथल- छोटे बच्चे मूड और भावनाओं के बदलाव से बहुत प्रभावित होते हैं। वजन और ऊंचाई में वृद्धि, भावनात्मक परिपक्वता, और खाने में स्वायत्तता के कारण बच्चे के थोड़े बड़े होने के साथ भोजन की परेशानी कम हो जाती है।

3. माता-पिता और घरेलू प्रभाव- यह सबसे महत्वपूर्ण कारण है। और वह कारण भी जिसे संशोधित किया जा सकता है। पारिवारिक वातावरण बच्चों के खाने के व्यवहार पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है । परिवार के इन व्यवहारों का उद्देश्य बच्चे में खाने की मात्रा और गति को बढ़ाना है। हालांकि, ये लंबे समय के लिए खाद्य विपत्ति का कारण बनते हैं। बच्चे के परिवार के व्यवहार जो भोजन में परेशानी के कारण बनते हैं वे हैं -

  1. माता-पिता में भोजन की गड़बड़ी- बच्चे आपने के मां - बाप में भोजन लेने की आदतों से प्रोत्साहित होते हैं। अगर वे भी स्वस्थ खाद्य पदार्थों में कम रूचि रखतें हैं, तो बच्चे भी यही सीखतें हैं। अगर मां- बाप बच्चे के खाने के आदतों से परेशान होते हैं या बच्चे को दंड देते है, रिश्वत दी देते है या पुरस्कृत करते है तो यह परेशानी लंबे समय तक रह सकता है।

  2. माता-पिता की चिंता (और टिप्पणियाँ)- "पतलेपन" या "लघुता" या उनके बच्चे के खाने की आदतों के बारे में विशेष रूप से किसी और के बच्चे की तुलना में। याद रखें कि हमें कैसा लगता था जब हमारे माता-पिता या समाज ने जताया था कि हमें कम अंक मिले हैं या दूसरों की तुलना में कम भुगतान वाला काम करते है। बच्चों में यही मनोविज्ञान संचालित होता है।

  3. पूरक भोजन की शुरूआत के अनुचित समय- यदि 6 महीने तक केवल स्तनपान नहीं किया जाता है, तो कम उम्र में ही भोजन की परेशानी शुरू हो सकती है। दूसरी ओर, अगर 6 महीने में पूरक भोजन या 9 महीने की उम्र तक ढेलेदार भोजन शुरू नहीं किया तो यह भोजन में परेशानी को जन्म दे सकता है। कम उम्र में भोजन की गड़बड़ी लंबे समय तक रहने की आशंका होती है।

  4. बच्चे के लिए अलग भोजन- माता-पिता अक्सर बच्चे के लिए अलग भोजन बनाते हैं (एक से डेढ़ वर्ष की उम्र के बाद भी)। यह इस डर से है कि बच्चा परिवार के अन्य सदस्यों का भोजन को चबाने या पचाने में सक्षम नहीं है। जब बच्चा दूसरों के लिए तैयार किया भोजन खाने से इनकार कर देता है, तब भी वे बच्चे के लिए अलग भोजन बनाते हें। लंबे समय में इससे बच्चे को भोजन परेशानी होती है।

  5. हमेशा बच्चे को अपने हाथों से खिलाना बच्चे एक वर्ष तक स्व-भोजन करने के लिए तैयार हो जाते हैं। जब बच्चा खुद से खाता है, तो वह खाने की गति और मात्रा (और कभी-कभी खाद्य पदार्थ) तय कर सकता है। एक से डेढ़ वर्ष के बाद भी माता-पिता के खिलाने से स्वायत्तता कम होती है और खाना बच्चे के लिए अप्रिय अनुभव बन सकता है।

  6. भोजन की बारे में अनुचित विचार- बच्चा कुछ भोजन (मसालेदार, कड़वा या खट्टा स्वाद) को पसंद नहीं करेगा या पचा नहीं पाएगा सोचकर उसका प्रयास भी नहीं करना। इसके अलावा, खाद्य पदार्थों के बारे में मान्यताएं जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है (हालांकि यह वैज्ञानिक लग सकता है)। उदाहरण के लिए, शरदी- खांसी में केला या अन्य फलों से परहेज करना या बुखार के दौरान चिकन से परहेज करना, क्योंकि "मुर्गी एक गर्म खून वाले जानवर हैं और इसलिए बुखार को और ज्यादा कर सकता है"

  7. व्याकुल कराने के लिए मोबाइल या टीवी जैसी तकनीकों का प्रयोग- इनका उपयोग खाने को गति देने के लिए किया जाता है। लेकिन लंबे समय में ये खिलाने में परेशानियों को बढ़ावा देता है। अध्ययन से पता चला है कि अत्यधिक स्मार्टफोन का उपयोग (यहां तक कि भोजन न देने के समय भी) बच्चों में नकारात्मक खाने के व्यवहार से जुड़ा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके उपयोग से मस्तिष्क में डोपामाइन उत्पादन होता है (अभिराम देने वाला और व्यसन उत्पन्न करने वाला रसायन), जो कि एक स्वस्थ भोजन प्रदान करने में असमर्थ होता है। हमने भी कई बार वीडियो गेम या फेसबुक चैट में व्याकुल होने की कारण भोजन या नींद में देरी की है। टीवी और फोन के विज्ञापन आपके बच्चे को शर्करा और कम पौष्टिक खाद्य पदार्थों की इच्छा को प्रोत्साहित कर सकते हैं।

खिलाने में परेशानी की रोकथाम और उपचार (आपके बच्चे की खाने की आदतों को सुधारने के लिए आप क्या कर सकतें हैं?)

हालांकि भोजन की सुस्ती आमतौर पर बच्चे के विकास और स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता, मेरा सुझाव है कि यदि व्यवहार चरम है तो बच्चे को एक बार बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएँ। उनके आश्वासन से अक्सर माता-पिता की प्रतिक्रिया में सुधार होता है जिससे बच्चे में खाने की आदतों में सुधार होता है। यदि बच्चे का वजन और ऊंचाई सामान्य है (जो आमतौर पर देखा जाता है), तो चिंता की बात नहीं है। यदि वे असामान्य हैं, तो बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा एक चेकअप उपयोगी है। यह तब भी किया जा सकता है जब बच्चे को अन्य बीमारी के लिए दिखाया जा रहा हो। यदि आप भोजन की गड़बड़ी के लिए बाल रोग विशेषज्ञ के पास जा रहे हैं, तो बच्चे ने पिछले तीन दिन खाया हर चीज को लिख लें। आप इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ग्रोथ चार्ट ऐप का उपयोग करके खुदसे बच्चे के विकास पर भी नजर रख सकते हैं।


मानसिकता

हमेशा एक विशेष समय की पकवान को खत्म करने के बजाय भोजन की गड़बड़ी को रोकने (या इलाज करने) का दीर्घकालिक लक्ष्य रखें। यह मानसिकता सभी रोकथाम और उपचार रणनीतियों की आधारशिला है। यदि आप अपने बच्चे के लिए इस मानसिकता को अपनाने के लिए तैयार नहीं हैं, तो कुछ भी और जानने से फायदा नहीं होगा। यह भी याद रखें कि यदि आपके बच्चे को खिलाने में बहुत परेशानी होती है, तो यह रातोंरात नहीं बदलेगा।

पहले 1 वर्ष (शैशवावस्था) में खाना

छह महीने के उम्र तक केवल स्तनपान कराएं और फिर दूसरे आहार पेश करें। विभिन्न प्रकार की सब्जियों का परिचय दें (एक बार में एक)। मै बाद में शिशु और बचपन के भोजन के लिए एक अलग लेख लिखुंगा। नौ महीने तक गांठदार और दानेदार भोजन शुरू कर दें। इस उम्र में भी बच्चे को स्व-भोजन (भोजन में उंगली डुबोकर) में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें।

पारिवारिक भोजन पर स्विच करना और स्वायत्तता बढ़ाना

1. परिवार के अन्य सदस्यों की तरह ही खाना दें

एक वर्ष की आयु तक बच्चे को घर पर तैयार सब कुछ खाने के लिए प्रोत्साहित करें। यह वह समय भी है जब उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों के लिए तैयार किया गया भोजन ही देना चाहिए । आप बच्चे के लिए पानी डालकर कम गाड़ा बना सकतें हैं। हालांकि, बहुत पानी से पोषक तत्व पतला हो सकता है जिससे कुपोषण की आशंका बढ़ती है। माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य जब वही खाना खातें हैं तो वे रोल मॉडल के रूप में बच्चे को खाने के लिए प्रोत्साहित करते है। यदि आप बहुत सारे फल और सब्जियां खाते हैं, तो आपका बच्चा भी खाएगा।

2. आदेश पने पर जल्द पकाने वाले रोसैया न बनें -

जब बच्चा मूल भोजन को अस्वीकार कर देता है, अपने बच्चे के लिए दूसरे भोजन तैयार न करें। लंबे समय में यह भोजन की सुस्ती को बढ़ावा देता है। अपने बच्चे को खाने के समय पूरा होने तक मेज पर रहने के लिए प्रोत्साहित करें, भले ही वह भोजन न करे।

3. बच्चे को खुद से खाने दें-

एक वर्ष की उम्र सही समय है जब चम्मच बच्चे को सौंप देना चाहिए । खुद से खाने की जिम्मेदारी और स्वायत्तता (माता-पिता के हमेशा चम्मच से खिलाने से विपरीत) बच्चे को खाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वे शुरुआत में बहुत गिराकर खाएंगे लेकिन यह प्रक्रिया का हिस्सा है। डेढ़ साल तक वे बिना ज्यादा गीराएं खाने में सक्षम हो जाते हें। याद रखिए कि वे पहले रेंगना सीखते हैं, फिर मुश्किल से चलना और बाद में वे आराम से दौड़ लेते हैं।

4. खाने के लिए एक दिनचर्या बनाएं-

हर दिन एक ही समय में नाश्ता और भोजन परोसें। यदि आपका बच्चा भोजन नहीं करता, तो नियमित समय स्नैक पौष्टिक आहार खाने का अवसर प्रदान करेगा । यहाँ स्नैक का मतलब है घर का बना खाना जैसे पकोड़ा, आमलेट इत्यादि, लेकिन आपको चिप्स, चॉकलेट, जूस, बेकरी और फ़ास्ट फ़ूड जैसी बाहरी स्नैक्स से बचना चाहिए । वे असव्स्थ और लत लगाने वाले पदार्थ हैं और भूख को मारते हैं।

5. अपने बच्चे की भूख का (या भूख न होने का) सम्मान करें -

यदि आपका बच्चा भूखा नहीं है, तो भोजन या नाश्ते के लिए बाध्य न करें । इसी तरह, कुछ खाद्य पदार्थों को खाने के लिए अपने बच्चे को रिश्वत, दंड या बल न दें । यह केवल भोजन पर एक शक्ति संघर्ष को प्रज्वलित करता है । इसके अलावा, आपका बच्चा भोजन के समय को चिंता और निराशा के साथ जोड़ सकता है या अपनी भूख और पेट भरने के संकेतों के प्रति कम संवेदनशील हो सकता है। अपने बच्चे को अभिभूत करने से बचने के लिए कम परोसें और उसे स्वतंत्र रूप से अधिक मांगने का अवसर दें।

6. भोजन का चयन और पकाने में बच्चे की भागीदारी बढ़ाएँ-

भोजन चयन (खरीदारी के दौरान और घर पर) और पकाने (माता-पिता के पर्यवेक्षण के साथ) में बच्चे की भागीदारी विशेष रूप से सहायक होती है। सब्जियों धोने, खाना पकाने के दौरान हलचल, प्रेशर कुकर की सिटी गिनने या टेबल सेट करने में मदद के लिए अपने बच्चे को प्रोत्साहित करें। अगर आपको एक पकवान पसंद नहीं है, परन्तु किसी कारण से उसकी तैयारी में भाग लेना पढ़े तो आपको पकवान पसंद आने की संभावना बढ़ जाती है (आप शायद दूसरे को भी बोलेंग कि पकवान अच्छा बना है)। बच्चे हमसे ज्यादा भावुक होते हैं। यदि वे भोजन के चयन और तैयारी में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं तो अक्सर भोजन पसंद करते हैं।

7. नए खाद्य पदार्थों की परिचय में धैर्य रखें-

छोटे बच्चे अक्सर नए खाद्य पदार्थों को छूते या सूँघते हैं, और उनके मुंह में छोटे टुकड़े डालते हैं और फिर उन्हें वापस बाहर निकाल सकते हैं। आपके बच्चे को नए भोजन को मुंह में लेने से पहले कुछ देर तक उससे खेलने की आवश्यकता हो सकती है। भोजन के रंग, आकार, सुगंध और बनावट के बारे में बात करके अपने बच्चे को प्रोत्साहित करें (न कि इसका स्वाद अच्छा है)। अपने बच्चे के पसंदीदा खाद्य पदार्थों के साथ नए खाद्य पदार्थ परोसें। जब तक वे परिचित न हो जाएं, अपने बच्चे को वह खाना बार बार परोसें। यदि बच्चा पहली बार आपने तैयार किया हुआ भोजन अस्वीकार करता है, तो उससे निराश न हों। अक्सर अपरिचित खाद्य पदार्थों धीरे धीरे मात्रा बढ़ाते में हुए बार बार परिचय कराने से बच्चे प्रदार्थ पसंद आता है (10-15 सकारात्मक अनुभवों की आवश्यकता हो सकती है)। कई बार कुछ महीनों के बाद भोजन को दोबारा बनाने से बच्चा उसे पसंद कर सकता है। हालांकि यदि यह स्थापित हो कि बच्चा एक निश्चित खाना को पसंद नहीं करता है, उसे खाने के लिए मजबूर न करें (बशर्ते वह कुछ प्रदार्थों तक सीमित हो)।

8. खाने को मज़ेदार बनाएं और रचनात्मक बनें-

कई बार बच्चा एक निश्चित वस्तु (जैसे ब्रोकोली या पत्तागोभी) को पसंद नहीं करता है, लेकिन सॉस या जैम के साथ परोसे जाने पर उन्हें खा लेता है। कुकी कटर से खाद्य पदार्थों को विभिन्न आकृतियों में काटें और इसे कुकी की तरह आकार दें। रात के खाने के लिए नाश्ते की पेशकश करें। विभिन्न प्रकार के चमकीले रंग के खाद्य पदार्थ परोसें। विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का परिचय दें और यह आदत को बनाए रखें।

9. ध्यान भटकने वाले उपकरणों को बंद करें-

घर में स्मार्टफोन और टीवी का उपयोग सीमित करें। चूंकि बच्चे माता-पिता को रोल मॉडल बनाते हैं, बच्चों में उनका उपयोग तभी कम किया जा सकता है जब माता-पिता स्वयं उनका उपयोग कम करते हैं। यदि यह संभव नहीं है, तो भोजन से कम से कम आधे घंटे पहले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रयोग को रोकने का एक अनुष्ठान करें। बच्चे को आधे घंटे के लिए अन्य गतिविधि में लिप्त होने दें। चूंकि डोपामाइन उत्पादन करने वाले गतिविधि से डोपामाइन उत्पादन न कराने वाले के साथ चुटकी में बदलना मुश्किल है, आधे घंटे का अंतर मददगार होता है। यह आपके बच्चे को खाने पर ध्यान भी केंद्रित कराएगा। याद रखें, आपका लक्ष्य लंबे समय तक खाने में परेशानी का रोकथाम और इलाज है, एक पकवान खत्म कराना नहीं।


10. इनाम के रूप में कभी भी चॉकलेट या मिठाई न दें-

पुरस्कार के रूप में मिठाई या चॉकलेट यह संदेश भेजता है कि वे सबसे अच्छे खाद्य पदार्थ हैं, जो उनके लिए बच्चे की इच्छा बढ़ा सकते हैं। आप फल, दही, या अन्य स्वस्थ विकल्पों के रूप में मिठाई को फिर से परिभाषित कर सकते हैं। इसके अलावा, दोस्तों और अन्य परिवार के सदस्यों को चॉकलेट या चिप्स उपहार के रूप में देने से हतोत्साहित करें। वे इसके बजाय स्वस्थ भोजन ला सकते हैं। यदि आप अपने बच्चे को पुरस्कृत करना चाहते हैं, तो गैर-खाद्य पुरस्कार दें (जैसे पार्क का दौरा) और इसे एक सप्ताह या उससे लंबे समय के लिए व्यवहार बनाए रखने के लिए दें। हालांकि आपको बच्चे को कभी दंडित नहीं करना चाहिए।

अंत में, माता-पिता अक्सर विटामिन के लिए पूछते हैं जब उनके बच्चे अच्छी तरह से भोजन नहीं करते है। हालांकि आमतौर पर विटामिन काम नहीं करते हैं। खाद्य परेशानी का कारण अक्सर ऊपर वर्णित सामाजिक-मनोवैज्ञानिक है। कम भूख लगना विटामिन की कमी के कारण दुर्लभ है। सभी बच्चों में से 5% से अधिक नहीं। अगर आपकी कार का टायर पंक्चर है, तो आप कितना भी पेट्रोल डालें, वह चलने वाला नहीं। इसके अलावा, चूंकि भोजन कराने की परेशानी से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, आमतौर पर विटामिन में कमी नहीं करते हैं। विटामिन के अनुचित उपयोग से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।


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