बुखार से पीड़ित बच्चों का कब घर पर इलाज करना उचित है और कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

Updated: Oct 9


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कोरोना के कारण हम अपने समय के सबसे चुनौतीपूर्ण दिनों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति में हमें अपने घरों से बाहर तभी जाना चाहिए जब अति आवश्यक हो। बच्चों को अस्पताल ले जाना और भी डरावना है। लेकिन हम ब्चों में होने वाले अन्य बीमारियों की भी अनदेखी नहीं कर सकते। यह अनिवार्य है कि हम यह जाने कि कब अपने बच्चों का इलाज घर पर कर सकते हैं (काउंटर दवाओं के साथ या बिना) और कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए बाल रोग विशेषज्ञ के ओ. पी. डी. में आने वाले बच्चों में बुखार सबसे आम लक्षण है। इनमें से कई बच्चों का घर पर ही इलाज हो सकता है (हां मैं इसे कहता हूं!), हालांकि माता-पिता बुखार से बहुत परेशान हो जाते हैं। इस लेख में मैं इस बात पर प्रकाश डालूंगा कि बुखार से पीड़ित बच्चों का कब हम घर पर ही उचित इलाज कर सकते हैं और कब बच्चों को डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए । इसके अलावा, मैं आपातकालीन विभाग को ले जाने की आवासक्यता करने वाली स्थितियों को सूचीबद्ध करूंगा। हालाँकि मुझे कहना होगा कि अगर माता-पिता को लगता है कि बच्चे को वास्तव में डॉक्टर को दिखाना चाहिए, तो हमेशा अस्पताल ले आयें। हमें अपने मरीजों की इलाज करने से खुसी मिलती है।

मुह के तापमान 100 ° फरेंहेट या 38 ° सेंटीग्रेड (हाँ कम से कम इतना ही तापमान होना चाहिए) से अधिक को बुखार कहा जाता है । सामान्य रूप में काँख का तापमान मुह के तापमान की तुलना में 1 ° फरेंहेट (या 0.5 ° सेंटीग्रेड) कम रेहता है।


बुखार जो घर पर ही इलाज करना उचित है (6 महीने से अधिक उम्र के बच्चे में)-

हालांकि कई माता-पिता के लिए उनके बच्चे में बुखार सबसे अधिक संकट में से एक है, यह केवल संकेत देता है कि शरीर संक्रमण से लड़ रहा है। बुखार एक लक्षण है, बीमारी नहीं। यद्यपि यह बच्चों में सुस्ती पैदा कर सकता है, अकेले बुखार आपके बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता, जब तक कि ओ तापमान > 105° फरेंहेट (या 40° डिग्री सेल्सियस) नहीं हो जाता है, जो सौभाग्य से बहुत ही कम देखने को मिलती है। बुखार (खांसी और ठंड के साथ या बिना) को पेरासिटामोल के साथ कम से कम पहले 2 से 3 दिनों के लिए घर पर ही इलाज किया जा सकता है। पानी पर्याप्त मात्रा में पीने की जरूरत है। यदि आपके पास घर पर थर्मामीटर है तो बच्चे की काँख या मुह (बेहतर) का तापमान हर 6 घंटे मापे। मैं यह भी बताना चाहूंगा कि 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में ज्यादातर खांसी की दवाओं की सिफारिश नहीं की जाती है (ज्यादातर बाल चिकित्सक संघों के अनुसार) । यह नाफा से अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। यद्यपि 1 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में शहद या शहद आधारित खांसी की दवाई दी जा सकती है। हालाँकि 1 वर्ष से कम उम्र में शहद हानिकारक हो सकता है और इस आयु वर्ग में इसे नहीं देना चाहिए।


कब बुखार से पीड़ित बच्चों को डॉक्टर दिखाने की जरूरत है?

1. 6 महीने से कम उम्र का बच्चा

2. बुखार> 101° फरेंहेट काँख में या 102° फरेंहेट मुह में इस तापमान से अधिक (केवल इस तापमान से अधिक) को उच्च डिग्री बुखार या “हाइ ग्रेड फीवर” कहा जाता है। यदि आपके पास सेल्सियस/सेंटीग्रेड थर्मामीटर है, तो संबंधित तापमान 37.5° काँख में 38° डिग्री मुह में हैं।

3.तीन दिन से ज्यादा दिन का बुखार

4. व्यापक चक्तते के साथ बुखार

5. यदि बच्चा पिछले कुछ दिनों में 50 % से कम खाना खा रहा है/ दूध पी रहा है


6. पेशाब कम आना

7. पेशाब के दौरान दर्द

8. उल्टी / बार-बार दस्त होना, या फिर पेट में दर्द

9. कान से दर्द या कान से पनि या पीप आना

10. एक या अधिक जोड़ों पर दर्द

11. कहीं से भी रक्तस्राव

12. यदि बच्चे को कोई दीर्घकालिक बीमारी हो (लिवर, गुर्दे, फेफड़े, हृदय आदि)

13. यदि बच्चा दवाओं पर है जो प्रतिरक्षा को कम करता है। जैसे की स्टेरॉयड



बच्चे को कब तुरंत आपातकालीन कक्ष में ले जाए ?

1. यदि बच्चा असामान्य रूप से व्यवहार कर रहा है, बेहोश लग रहा है या ज्यादातर समय सो रहा है

2. फिट (या कुछ भी जिस पर आपको संदेह है वह एक फिट है)

3. बार-बार उल्टी होना

4. सांस फूलना

5. यूरिन पास करना बहुत कम या 6 घंटे से ज्यादा बिलकुल भी न चलना

6. रक्तस्राव जो बंद नहीं होता है


अधिकांश भारतीय राज्यों में आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा के लिए फोन नंबर 108 या 111 है।


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