जीवन के पहले 1000 दिन अर्थात्, माँ के गर्भ में 270 दिन (या 9 महीने) और जन्म के बाद के पहले दो वर्ष खिलाने की महत्वपूर्ण अवधि होती है। इस  दौरान उचित पूरक आहार द्वारा पर्याप्त पोषण प्रत्येक बच्चे की पूर्ण मानव क्षमता के विकास के लिए मौलिक है। दो वर्ष की आयु के बाद, पहले हुए कुपोषण और अल्पता को दूर करना बहुत मुश्किल है।

       प्रारंभिक वर्षों के कुपोषण के तत्काल परिणाम गंभीर बीमारी, विलंबित मानसिक और शारीरिक कुशलता (जैसे चलने या बात करने में देरी) हैं। दीर्घावधि में, इससे बौद्धिक प्रदर्शन, कार्य क्षमता, प्रजनन परिणामों, और समग्र स्वास्थ्य में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

       इस लेख में, मैं 6 महीने केवल स्तनपान के बाद पूरक आहार शुरू करने और छोटे बच्चों में खिलाने के लिए इष्टतम रणनीतियों पर चर्चा करूंगा। “पूरक भोजन”  या “पूरक आहार” शब्द का उपयोग करना और “वीनिंग डायट” शब्द से बचना महत्वपूर्ण है, क्योंकि लक्ष्य माँ के दूध को पूरक कराने का है, न कि उसे बन्द करने का।पूरक भोजन की शुरुआत ठीक 6 महीने की आयु में की जानी चाहिए

पूरक भोजन के सिद्धांत

1. माँ के दूध से पारिवारिक भोजन में स्विचिंग6 महीने के बाद पूरक भोजन-5 नवीनतम साक्ष्य आधारित सिद्धांत

      बच्चे को पहले छह महीने (180 दिन) के अंत तक केवल मां का दूध देना चाहिए। पढ़े “स्तनपान-लाभ, सही तरीके और 2 साधारण चुनौतियां” । पूरक भोजन ठीक 6 महीने में शुरू करना चाहिए, अधिमानतः ऊर्जा-घने, घर के भोजन के साथ।  माँ- बाप अज्ञानता से अक्सर छह महीने से पहले ही पूरक भोजन शुरू कर देते हैं। भोजन तैयार करने और परोसने के समय संक्रमण होने की संभावना होती है। हालांकि, माँ के दूध में संक्रमण लगभग असंभव है। छह महीने से पहले पूरक भोजन इस प्रतिरक्षात्मक रूप से कमजोर आयु वर्ग में संक्रमण की संभावनाको बढ़ाती है।

       दूसरी ओर, केवल मां का दूध 6 महीने के बाद अपर्याप्त होती है। शिशु इस उम्र में सब कुछ अपने मुंह में डालना शुरू कर देते हैं, जिससे उन्हें वैसे भी आंतों में संक्रमण की खतरा रहती है। पूरक भोजन की विलंबित परिचय से भी विकास लड़खड़ा जाता है और कुपोषण हो सकता है। इस अवधि के दौरान बच्चे कुपोषित होने की सबसे अधिक संभावना है। जैसा कि मैंने पहले कहा, इस अवधि के दौरान कुपोषण से विकास में प्रतिकूल परिणाम हैं।

      पूरक आहार के शुरुआती कुछ महीनों (6 से 9 महीनों के बीच) में भी मां का दूध बच्चों का मुख्य भोजन बना रहना चाहिए। सामान्य स्तनपान के साथ हस्तक्षेप को कम करने के लिए, स्तनपान के बीच पूरक भोजन देना चाहिए। स्तनपान कम से कम दो साल की उम्र तक जारी रखना होगा। पहले दो सालों में तेजी से मस्तिष्क विकास होती है और माँ के दूध में मस्तिष्क विकास के लिए आवश्यक आहार होती हैं।

       पूरक भोजन के लिए सबसे पहला अनाज चावल होना चाहिए, क्योंकि यह आसानी से पचता है और ग्लूटन मुक्त होता है। ग्लूटन एक प्रकार का प्रोटीन है जो गेहूं, राई, स्पेल्ट और  जौ जैसे अनाज में पाया जाता है। यह प्रोटीन गेहूं की एलर्जी, सीलिएक रोग औ ग्लूटन संवेदनशीलता आदि से पीड़ित बच्चों लिए समस्याएं पैदा करता है।

        चूंकि 6 महीने में यह जानना मुश्किल है कि क्या बच्चे को इनमें से कोई भी बीमारी है, बेहतर है कि शुरुआत में इन अनाजों से बचें। हमेशा एक अनाज से पूरक भोजन शुरू करना बेहतर है। इसके बाद बहु अनाज और फिर अनाज-दाल संयोजन होता है। अनाज-दाल संयोजन में, अनाज में अनुपस्थित पोषक तत्व दाल में होंगे और दाल में अनुपस्थित पोषक तत्व अनाज में रहेंगे।

        एक बार जब बच्चा चावल लेना शुरू कर देता है, तो माँ गेहूं, दाल, सब्जियों के साथ अलग-अलग संयोजन बना सकती है। पूरक भोजन के सामग्री आसानी से उपलब्ध और माता-पिता के लिए स्वीकार्य होना चाहिए। कंद, फल, बिस्कुट, और केले के पीसकर पूरक खाद्य पदार्थों के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बार-बार खिलाना वांछनीय है क्योंकि यह शिशु की स्वीकृति में सहायता करता है ।पूरक आहार के शुरुआती कुछ महीनों में माँ का दूध बच्चे का मुख्य भोजन रहता है

पूरक आहार के अनुसूची का उदाहरण

6 महीने की उम्र में- चावल पर आधारित दलिया जो गुड़ / चीनी, तेल / घी और पशु दूध से समृद्ध है। स्तनपान के साथ 1-2 चम्मच से शुरू करें और धीरे-धीरे 1/2 से 1 कप और बाद में प्रति दिन 1 से 2 बार यही भोजन दें।

6-9 महीने  में- 6 महीने की उम्र के बाद पारिवारिक भोजन को मसल के गुड़ / चीनी और तेल / घी डालकर पेश करें। दाल, मसले हुए कंद और सब्जियों के साथ मसले हुए चावल, सूप, मसले हुए फल, बिस्कुट, अंडे की जर्दी जिसके बाद सफेद हिस्सा दिन में 4-5 बार दिया जा सकता है। अंडे का सफेद हिस्सा कुछ बच्चों में एलर्जीनिक होता है, इस क्रम से एलर्जी की आशंका कम होती है।

9-12 महीने में- 9 महीने के बाद, गर्म मसालों से परहेज करते हुए, पारिवारिक भोजन को नर्म बनाकर पेश करें। थोड़ा दूध डालकर रोटी और अन्य कठोर खाद्य पदार्थों को नर्म बनाया जा सकता है। पारिवारिक भोजन दिन में 4- 6 बार दें और धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं। विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों से जल्द ही परिचय कराएं। पढ़े “बच्चों में खिलाने की समस्याएं (आपके बच्चे के खाने केआदतों को सुधारने के लिए 10 सामान्य से विपरीत तरीके)”। 6 महीने के बाद पूरक भोजन, पूरक आहार, पूरक खाना

      एक वर्ष की आयु तक, बच्चे को घर पर पका हुआ सब कुछ देना चाहिए और उन्हें खुद से खाना चाहिए। इसे ‘फैमिली पॉट फीडिंग’ कहा जाता है। इस दौरान, सब्जियां, विशेष रूप से हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, मछली, मांस आदि को भी बच्चे को पेश करना चाहिए।

      यह आवश्यक है कि धीरे-धीरे परिवार के सामान्य भोजन पर स्विच किया जाए और बच्चा स्वयं खाए। पारिवारिक भोजन को ही गर्म मसाले मिलाए बिना और मसल कर बच्चे को परोसा जा सकता है। इससे धीरे धीरे शिशु पारंपरिक खाद्य पदार्थों के आदी बन जाते हैं। नया खाद्य प्रदार्थ का परिचय सुबह के सत्र में ही करें और एक समय में केवल एक नया प्रदार्थ का परिचय दें।

एक से 3 साल के बच्चे (टॉडलर्स) को खिलाना- एक साल के बच्चे जितना माँ खाती है, उसका आधा भोजन की आवश्यकता होती है। यह 5 से 7 सत्र में दिया जाना चाहिए (वयस्कों का 3 भोजन के विपरीत)। टॉडलर्स खेलने में अधिक रुचि रखते हैं और चूंकि उनमें सामान्य रूप में शिशुओं की तुलना में कम भूख और धीमी वृद्धि दर होती है, उन्हें खाने के लिए मनाना पड़ता है। खेलते समय भोजन करना, एक विशेष बर्तन, “अक्षयपात्र” से भोजन दिया जा सकता है। अक्षयपात्र एक विशेष बर्तन है जिसमे खाद्य सामग्री के टुकड़े डालकर खेलते हुए खाया जा सकता है।खाद्य पदार्थों की विस्तृत विविधता का प्रारंभिक परिचय बचपन में खाद्य समस्याओं को रोकता है

2. पूरक खाना में पर्याप्त ऊर्जा पोषक तत्व को सुनिश्चित करना

        ऊर्जा घने का मतलब है कम भोजन से ऊर्जा की उच्च मात्रा प्रदान करना। भोजन में तेल या घी डालकर ऊर्जा घनत्व को बढ़ाया जा सकता है क्योंकि एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट (3.4 किलो कैलोरी) और प्रोटीन (4 किलो कैलोरी) की तुलना में वसा प्रति ग्राम (9 किलो कैलोरी) अधिक ऊर्जा देती है। यह रोटी के बजाय परांठा बनाकर और उबले अंडे के स्थान पर ऑमलेट या उबले चावल को तल कर परोसने (फ्राइड राइस) से हो सकता है। परोसने से पहले चीनी / गुड़ और घी / मक्खन / तेल मिलाने से भी ऊर्जा घनत्व बढ़ती है।

        पानी मिलाकर खाद्य पदार्थों को अत्यधिक पतला न बनाए। इससे उर्जा घनत्व घटती है। दलिया जैसे खाद्य प्रदार्थ, चम्मच को थोड़ा झुकाने पर टिके रहता है तो पर्याप्त गाढ़ा है। वयस्कों में तीन बड़े भोजन के विपरीत छोटी मात्रा में 5 से 7 बार उच्च ऊर्जा घने भोजन देने से बच्चों के छोटे पेट की समस्या से भी निपटा जा सकता है।

       किण्वित दलिया, अंकुरित आटे का उपयोग और पीसने से पहले अनाज को टोस्ट करके खाद्य प्रदार्थ को और पौष्टिक बनाया जा सकता है। अनाज को भिगोने से पाचनशक्ति और विटामिन की मात्रा बढ़ेगी। अंकुरण करने से भी विटामिन की मात्रा बढ़ती है। किण्वन से (जैसे, दही) विटामिन सी की मात्रा और पाचनशक्ति बढ़ती है। इससे खाद्य प्रदार्थ को ज्यादा दिन तक भी रखा जा सकता है। अगर अभी भी कैलोरी कम पढ़ रही है तो तत्काल तयार होने वाले भोजन (जैसे सेरेलेक) को दिन में एक बार दिया जा सकता है। वे कुछ विटामिन और खनिज भी प्रदान करते हैं।कुछ सरल कदम पूरक खाना को ऊर्जा घने और पोषक तत्वों से भरपूर बना सकते हैं

पूरक भोजन देने के दौरान कुपोषण से लडने के लिए तीन महत्वपूर्ण रणनीतियाँ हैं

स्तनपान जारी रखना

वनस्पति प्रोटीन (दालें)

पशु प्रोटीन (अंडे / मांस)

     आई. सी. डी. एस. (एकीकृत बाल विकास सेवा) जैसे प कार्यक्रमों का उपयोग इन रणनीतियों का पालन करने में मदद करता है। जो बच्चे इस सुविधा का लाभ नहीं उठाते, उनके मां- बाप को ‘अक्षयपात्र ’ या प्ले स्कूल में अतिरिक्त भोजन की व्यवस्था करनी चाहिए।

पूरक भोजन के लिए घर का बना बनाम तात्कालिक खाद्य पदार्थ

        पूरक भोजन घर का बना या तात्कालिक (जैसे सेरेलेक) हो सकता है। घर का बना खाना किफायती, आसानी से उपलब्ध, सांस्कृतिक रूप से स्वीकार किया जाने वाला, विविध और पारिवारिक भोजन के करीब होता है। दूसरी ओर, तात्कालिक खाद्य पदार्थ सिफारिशों के अनुसार संतुलित पोषक तत्व प्रदान करते हैं। दोनों प्रकार के भोजन को फायदे और नुकसान के लिए विश्लेषण किया जाना चाहिए।
दोनो के उचित संयोजन से विटामिन और खनिज का संतुलन और स्वास्थ्य पारिवारिक भोजन की आदतों के विकास में सबसे अच्छा परिणाम प्राप्त हो सकता है। हालांकि, पोषक तत्व पर अत्यधिक ध्यान देने से ज्यादा फायदा नहीं है। विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री का पर्याप्त मात्रा पर ध्यान देना उपयोगी है।

3. संवेदनशीलता से खिलाना

लंबे समय तक प्रभावी भोजन कराने के लिए मनोवैज्ञानिक व सामाजिक देखभाल की आवश्यकता होती है। संवेदनशील भोजन का पालन करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है।

  1. शिशुओं को सीधे खिलाएं और बड़े बच्चों की केवल सहायता करें। एक वर्ष की उम्र से अपने से खाने दें। मां-बाप को पूरी तरह अपने हाथों से खिलाने से परहेज़ करना चाहिए। पढ़े “बच्चों में खिलाने की समस्याएं (आपके बच्चे के खाने केआदतों को सुधारने के लिए 10 सामान्य से विपरीत तरीके)”. जब वे खुद को खाते हैं, तो उनकी भूख और तृप्ति के संकेतों के प्रति संवेदनशील रहें। अपने बच्चे की भूख (या भूख की कमी) का सम्मान करें।
  2. धीरे और धैर्यपूर्वक भोजन कराएं। बच्चे को खाने के लिए प्रोत्साहित करें, लेकिन मजबूर न करें।
  3. यदि बच्चे कई प्रकार कें खाद्य पदार्थों को खाने से इनकार करते हैं, तो विभिन्न खाद्य संयोजनों, स्वाद, बनावट और प्रोत्साहन के तरीकों का प्रयोग करें। अपने बच्चे को भोजन के रंग, आकार, सुगंध और बनावट के बारे में बात करके प्रोत्साहित कर सकते हैं (न कि इसका स्वाद अच्छा है बोलकर)।
  4. भोजन के दौरान ध्यान भंग करने वाले चीजें विशेषकर मोबाइल या टीवी को बन्द रखें।
  5. याद रखें कि भोजन का समय सीखने और स्नेह का समय है – बच्चों से भोजन के दौरान बात करें। आपका उद्देश्य बछों मेँ लंबे समय तक अच्छा भोजन व्यवहार होना चाहिए, न कि एक समय क भोजन खत्म करना।

4. पूरक भोजन की सुरक्षित तैयारी और भंडारण

स्वच्छता पर हमेशा ध्यान दें

  1. भोजन तैयार करने और खिलाने से पहले अपना और बच्चों के हाथ साबुन से धोएं।
  2. खाना को तैयारी के तुरंत बाद परोसने से रोगाणु के साथ संदूषण की संभावना को कम रहती है।
  3. भोजन बनाने और परोसने के लिए साफ बर्तनों का उपयोग करें।
  4. बच्चों को खिलाते समय साफ कप और कटोरे का उपयोग करें।
  5. दूध पिलाने के लिए बोतल क इस्तेमाल न करें। इन्हे साफ रखना मुश्किल है। कटोरी और चम्मच या एक कप का उपयोग करें।

       दस्त शैशवावस्था दूसरे छमाही के दौरान सबसे ज्यादा होती है जब पूरक खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ जाता है और बच्चा अभी भी प्रतिरक्षात्मक रूप में कमजोर रेहतें हैं। क्योंकि उन्हें साफ रखना मुश्किल है, दूध के बोतल कीटाणु के संरचन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग हैं।

5. बीमारी के दौरान और बाद में खान पान

बीमारी के दौरान, शरीर में पानी की आवश्यकता सामान्य से अधिक होती है। बीमार बच्चे अन्य खाद्य पदार्थों की तूलना में मां के दूध को प्राथमिकता देते हैं। बार-बार स्तनपान कराने से पर्याप्त पानी और पोषण भी सुनिश्चित होता है। इसके आलावा माता-पिता को बच्चे को नरम, विविध, स्वादिष्ट, पसंदीदा भोजन खाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। बीमारी के बाद, बच्चे अधिक बार भोजन खाने के लिए प्रोत्साहित करें। अतिरिक्त भोजन की आवश्यकता तब तक होती है जब तक बच्चा बीमारी मेँ घटा हुआ वजन को वापस नहीं पा लेता और फिर से अच्छी तरह से बढ़ना शुरू कर नहीं देता।

पूरक भोजन पर पुस्तकें

पूरक भोजन पर आगे पढ़ें

  1. WHO international feeding guidelines
  2. Guiding Principles for Complementary Feeding

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