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       माँका दूध सभी नवजात शिशुओं के लिए आदर्श है। यह सबसे बड़ा उपहार है जो एक माँ अपने बच्चे को दे सकती है। इसमें वे सभी पोषक तत्व होते हैं जो शिशु को जीवन के पहले 6 महीने तक चाहिए। छह महीने की उम्र तक अनन्य स्तनपान देखभाल का मानक है। स्तनपान अब बच्चे के साथ-साथ माँ का भी मानव अधिकार के रूप में स्वीकार किया जाता है।

     विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार 6 महीने की उम्र तक अनन्य स्तनपान हर साल 800,000 बच्चों की जान और 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर बचा सकता है। यह 120 देशों की जनसंख्या से अधिक है। धन के साथ जीवन की तुलना करना अनुचित है, लेकिन यह राशि 140 देशों की जीडीपी से अधिक है और अगर भारत का स्वास्थ्य बजट 2020 का ही रहता है तो 300 बिलियन 33 वर्षों के लिए काफी है! इसके अलावा, ध्यान दें कि दुनिया में हर 6 लोगों में से एक भारत में है।

स्तनपान के लाभ- आपको अपने बच्चे को स्तनपान क्यों कराना चाहिए?

  1. पोषण की श्रेष्ठता- माँ के दूध में वे सभी पोषक तत्व अनुकूल अनुपात में होते हैं जिनकी आवश्यकता शिशु की विकास के लिए जरूरी है और ऐसे रूप में जो शिशु आसानी से पचा सकें।
  2. अनुकूलित पोषण स्तन के दूध की संरचना शिशु की बदलती जरूरतों के साथ बदलती है। यदि बच्चे का जन्म समय से पहले होती है, तो दूध की रचना भी जरूरतों की हिसाब से बदल जाती है। दूध पीलाने के एक सत्र के दौरान भी, प्रारंभिक दूध (फॉरमिल्क) और अंत का दूध (हाइंडमिल्क) अलग-अलग होते हैं। फॉरमिल्क प्रोटीन, शक्कर, विटामिन, खनिज और पानी से भरपूर होता है जो बच्चे की प्यास बुझाता है। हाइंडमिल्क अधिक ऊर्जा प्रदान करता है और तृप्ति की भावना देता है। फॉर्मूला पाउडर या पशु के दूध के साथ ऐसा अनुकूलन असंभव है।
  3. संक्रमण से रोकथाम स्तन का दूध में कोई भी हानिकारक जीवाणु घुस नहीं सकता जबकि पशु के दूध या पाउडर के में संक्रमण होने का अधिक खतरा है। माँ के दूध में संक्रमण से लड़ने वाले एंटीबॉडी भी होते हैं। स्तन का दूध दस्त, निमोनिया, कान, मुंह और दांतों के संक्रमण को रोकता है। यदि वे होते हैं, तो स्तनपान करने वाले शिशुओं में हल्का होते हैं।
  4. अन्य बीमारियों से बचाव स्तनपान भविष्य की एलर्जी, अस्थमा, मधुमेह, मोटापा और यहां तक कि कुछ कैंसर (लिंफोमा) से भी बचाता है।
  5. मानसिक वृद्धि- स्तन के दूध में डीएचए (डोकोसाहेक्सिनोइक एसिड) जैसे कई पदार्थ होते हैं जो मस्तिष्क के विकास में मदद करते हैं। बहुत से पाउडर इसके नकल करने की कोशिश करते हैं, लेकिन अभी तक परिणाम खराब ही रहा है। जिन बच्चों को स्तनपान कराया गया था अध्ययनों में उनके पाउडर दूध वाले बच्चों की तुलना में अधिक आईक्यू था। यह कहा जाता है कि स्तन का दूध मस्तिष्क के विकास के लिए होता है और गाय का दूध शरीर के विकास के लिए (मोटापा के लिए) । स्तनपान से “प्यार का हार्मोन” ऑक्सीटोसिन का उत्पादन होता है, जो माँ और बच्चे के बीच भावनात्मक संबंध को बढ़ाता है।
  6. माँ को होने वाले लाभ- जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू करने से किया ऑक्सीटोसिन की वृद्धि होती है, जिससे गर्भ सिकुड़ जाता है, जिससे रक्तस्राव कम होता है। स्तनपान गर्भावस्था के दौरान प्राप्त अतिरिक्त वजन को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। यह स्तन और अंडाशय के कैंसर के खतरे को भी कम करता है। अंत में स्तनपान सुविधाजनक है और आर्थिक और समय की बचत भी। आपको इसे प्रदान करने के लिए कुछ भी नहीं चाहिए और कोई तैयारी की आवश्यकता नहीं है।

सफल स्तनपान के लिए कदम

तैयारीसफल स्तनपान के लिए तैयारी

      गर्भावस्था के दौरान, अपने स्तन की जांच करवाने के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ (या अपने स्थानीय दाई या आशा) से अनुरोध करें। इससे स्तनपान में किसी भी संभावित बाधा से (गढ़े निपल्स की तरह) बच्चे के जन्म से पहले ही निपटा जा सकता है। आप इस जांच के लिए अपने पति या सास को साथ ले जा सकती हैं। इससे उनका स्तनपान के लिए समर्थन बढ़ेगा।

 

दीक्षा

     सामान्य प्रसव के आधे घंटे और सिजेरियन जन्म के चार घंटे के भीतर स्तनपान का प्रारंभ करना चाहिए। कई घरों में स्तनपान शुरू करने से पहले सोने से धुला पानी, शहद, ग्लूकोज इत्यादि शिशु को देते हैं। ये प्यास बुझाती हैं और स्तन चूसने की प्रयास को कम करती जिससे स्तनपान शुरू करने की सफलता को बहुत कम हो जाती है। इनसे दस्त और अन्य संक्रमण भी हो सकते है।

      शुरू के कुछ दिनों में जो दूध आती है उसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है। यह काफी कम आती है लेकिन शुरुआती दिनों में इतनी मात्रा बच्चे के लिए पर्याप्त है। कुछ घरों में, कोलोस्ट्रम को बच्चे को देने से परहेज किया जाता है। हालांकि, यह देना बेहद जरूरी है। इसमें एंटीबॉडी होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

विस्तार

  1. बच्चे को 6 महीने की उम्र तक केवल स्तनपान कराना चाहिए। और कुछ नहीं (दवाओं को छोड़कर) दिया जाना चाहिए, पानी भी नहीं। शिशु की प्यास को शांत करने के लिए स्तन के दूध में पर्याप्त पानी होता है।
  2. दो हार्मोन जो स्तनपान में महत्वपूर्ण हैं, प्रोलैक्टिन और ऑक्सीटोसिन हैं (ऊपर वर्णित प्यार का हार्मोन)। प्रोलैक्टिन दूध की उत्पादन और ऑक्सीटोसिन स्तन से दूध को निकाल ने के लिए जिम्मेदार है। शरीर इस तरह से कार्य करता है कि जब बच्चा स्तन को अधिक चूसता है, दोनों हार्मोन अधिक उत्पन्न होते हैं और दूध भी अधिक निकलता है। इसलिए स्तनपान जल्द शुरू करना, बार-बार करना और प्रत्येक सत्र में स्तन को खाली कराना महत्वपूर्ण है। ऑक्सीटोसिन का उत्पादन तब बेहतर होता है जब माँ को अपने स्तनपान कराने की क्षमता पर विश्वास होती है और तनाव से उत्पादन कम होती है।
  3. एक स्तन को खाली कराने के बाद ही दूसरी तरफ से स्तनपान कराना चाहिए। इससे बच्चे को फॉरमिल्क और हाइंडमिल्क दोनो का लाभ मिलता है।
  4. बच्चे की मांग के अनुसार दूध पिलाना अनुकूल है। सभी शिशु में लागू कराने लायक आदर्श अनुसूची नहीं है। दूध उत्पादन, चूसने की आदत, पेट की क्षमता आदि के रूप में हर बच्चे में भिन्नता है। शुरू में लगातार स्तनपान का अभ्यास करें और बच्चे को-आत्म-नियमन ’की अनुमति दें। माँ जल्द ही पता लगा पाती है कि बच्चा दूध पीने के बाद कितना देर आराम करता है। वह बाकी अवधि को समायोजित कर सकती है।
  5. दूध पिने के दौरान बच्चा बहुत हवा निगल सकता है। इससे पेट की गड़बड़ी, दर्द (शूल) और दूध का थूकन या उल्टी हो सकती है। दूध पिलाने के बाद दस पंद्रह मिनट के लिए बच्चे के पीठ को थपथपाकर हवा बाहर निकालने से इससे बचा जा सकता है।
  6. मां या बच्चे के बीमार होने पर स्तनपान जारी रखना चाहिए। यह आम सर्दी, बुखार, दस्त, अस्थमा, आदि जैसे संक्रमणों के दौरान किया जा सकता है। यह बीमार बच्चे के लिए सबसे आसानी से पचने वाला भोजन और शांतिकारक है। अक्सर यह कई शिशुओं के लिए जीवन रक्षक के रूप में कार्य करता है।
  7. मां द्वारा ली गई सभी दवाएं दूध के माध्यम से बच्चे को जा सकती हैं। हालांकि उनमें से कई सुरक्षित हैं, मेरी सलाह है कि यदि आप को कोई दावा लेने की जरूरत है तो आप अपने बाल रोग विशेषज्ञ से जरूर परामर्श करें।

स्तनपान की तकनीक

सही तकनीक के साथ, स्तनपान माँ के लिए एक प्राकृतिक और सुखद अनुभव होता है। हालांकि, कई महिलाओं को इसे सीखने के लिए पर्याप्त सहायता की आवश्यकता होती है। कई अस्पतालों में स्तनपान परामर्शदाता उपलब्ध है।

आसन

माता की आसन

     माँ किसी भी आसन को अपना सकती है जो उसके और बच्चे के लिए आरामदायक हो। वह बैठ या लेट सकती है। माँ के पीठ को अच्छी तरह से सहारा दिया जाना चाहिए और बच्चे पर झुकने से परहेज करना चाहिए।

स्तनपान-आसन माता की आसन 2स्तनपान-आसन माता की आसन

बच्चे की आसन

सुनिश्चित करें कि कपड़े पर लपेट कर शिशु को गर्म रखा जाए।

  1. गर्दन या कंधों को ही नहीं बल्कि पूरे शरीर को सहारा दें
  2. सिर और शरीर गर्दन में किसी भी मोड़ के बिना एक पंक्ति में होना चाहिए
  3. शिशु के शरीर को माँ की ओर होना चाहिए । शिशु और माँ के पेट एक दूसरे को छूते हुए होने चाहिए।
  4. बच्चे की नाक निप्पल के स्तर पर होनी चाहिए।

आसक्ति

   बच्चे का मुंह स्तन से सही तरह जुड़ने से ही स्तनपान कुशल होगी। सही आसक्ति से स्तन पर चोट से भी बचा जा सकता है। निम्न सही आसक्ति के संकेत देते हैं

  1. बच्चे का मुंह खुला हुआ है
  2. मुंह निप्पल और अरोला (स्तन का काला हिस्सा जो निप्पल के चारों तरफ़ होते है) को ढकता है। बच्चे को अरोला को चूसना होगा, निप्पल को नहीं।
  3. बच्चे की ठुड्डी स्तन को छू रही है।
  4. निचला होंठ उलटा है

स्तनपान की समस्याएं

1. कम दूध उत्पादन

       यह स्तनपान कराने वाली मां की सबसे आम शिकायत है। लगभग 80 से 90% माताओं में, यह “परिकल्पित” कम उत्पादन होता है। मेरे प्रोफेसर कहते थे, “मनुष्य ही एकमात्र जानवर है जिसे अपनी संतान को खिलाने के लिए पाउडर या दूसरे जानवर की दूध की आवश्यकता होती है क्योंकि केवल हम हैं जो यह सोच सकते हैं कि अपने स्तन का दूध अपर्याप्त है।”

    “बच्चा रो रहा” दूध का उत्पादन कम में कमी या भूख का अप्रभावी संकेत नहीं है (भले ही बच्चे को खिलाने के बाद रोना बंद हो जाए)। मुंह में कुछ भी डालने से ज्यादातर शिशु रोना बंद कर देते हैं। इसी तरह से एक पेसिफियर काम करता है। अस्पतालों में, हम रक्त का नमूना लेते समय बच्चे के मुंह में चीनी युक्त गेज डालते हैं। यह रोना कम कर देता है (और अध्ययन में उनके दर्द कम करने के लिए प्रभावी देखा गया है)।

यदि निम्नलिखित है तो बच्चे को पर्याप्त दूध मिल रहा है।

  1. वजन पर्याप्त रूप से बढ़ रहा है (पहले 10 दिनों में वजन घटने के बाद) जैसा कि मेरे दूसरे लेख, “नवजात शिशु के दस लक्षण जो माता-पिता को असामान्य लगते हैं (लेकिन सामान्य हैं)” में वर्णित है
  2. प्रति दिन 6 से 8 बार पेशाब आ रहा है । अगर बच्चे को डायपर पहनाया जाता है, तो उसके मूत्र की सही
  3. संख्या का पता लगाना मुश्किल है। लेकिन अगर आपको डायपर दिन में 3 या उससे अधिक बार बदलना पड़ता है, तो मूत्र उत्पादन अच्छा है।
  4. बच्चे दूध पीने के बाद 2 से 3 घंटे सो जाता है।
  5. जब जागता है तो बच्चा चंचल रहता है और हर समय रोता ही नहीं रेहता।

         संक्षेप में, रोने से यह संकेत नहीं मिलता कि शिशु को अपर्याप्त दूध मिल रहा है, भले ही फार्मूला दूध पिलाकर रोना रुक जाए । यह केवल दिखाता है कि बच्चा असहजता महसूस कर रहा है (शायद नहीं भी)। बच्चा माता-पिता के साथ केवल रोकर संवाद कर सकता है। वह मुंह से नहीं बोल सकते हैं कि “मैं गर्म, ठंडा, थका हुआ महसूस कर रहा हूं, या मेरी पीठ में खुजली हो रही है, या डायपर गीला हो गया है”। शिशु को सीधे कंधे पकड़ने और हिलाने-डुलाने से ज्यादातर शिशु शांत हो जाते हैं।

यदि उपरोक्त शर्तें पूरी नहीं हो रही है और दूध का उत्पादन वास्तव में अपर्याप्त है, तो इसका निम्न कारण हो सकता है

  1. धारणा कि दूध का उत्पादन कम है। जैसा कि ऊपर वर्णित है, जब माँ आश्वस्त रहती है, ऑक्सीटोसिन का उत्पादन (और इसलिए दूध का उत्पादन) बढ़ती है और किसी भी तनाव से यह कम हो जाती है।
  2. डम्मी, पेसिफायर और दूध पिलाने वाले बोतल का उपयोग। ये बच्चे को दस्त और अन्य बीमार करने वाले जीवाणु से संक्रमित करते हैं।
  3. स्तनपान शुरू करने से पहले या साथ में अन्य चीजें खिलाना या पिलाना जैसे कि चीनी का पानी, ग्राइप वाटर (जी हां ग्राइप वाटर हानिकारक है! और किसी भी लाभ से रहित), शहद, फार्मूला दूध या अन्य आहार। एक वर्ष से कम बच्चों में शहद गंभीर बोटुलिनम का कारण बन सकता है।
  4. स्तन के दर्दनाक स्थितियाँ जैसे निप्पल में घाव या स्तन में सूजन
  5. रात में स्तनपान का अभाव (प्रोलैक्टिन का उत्पादन रात में सबसे अधिक होता है)
  6. स्तन का पूरी तरह खाली न होना जब बच्चा बीमार या छोटा हो या जब बच्चा कम दूध पीता हो
  7. माँ में कूपोषण।

     साथ ही, पहले 3 से 4 दिनों (जब कोलोस्ट्रम का स्राव होता है) में दूध का उत्पादन कम होता है, केवल 30 से 40 मिली। हालांकि यह पहले कुछ दिनों के लिए पर्याप्त है। अगर माता-पिता को लगता है कि दूध कम आ रही है, तो फार्मूला आजमाने से पहले मै बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह देता हूं।

अंत में, दूध का उत्पादन स्तन के आकार पर निर्भर नहीं होता। छोटे स्तनों वाली माताएं अन्य के समान दूध का उत्पादन करती हैं

2. कामकाजी माँ

       अधिकांश भारतीय राज्यों में स्तनपान के लिए 6 महीने का मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाता है। फिर भी, यदि आपका नियोक्ता इसे प्रदान नहीं करता है, तो जितना संभव हो उतना मातृत्व अवकाश लें। सीधे स्तन से कम से कम 4 महीने दूध दें। अगर आप के कार्यालय पर डे केयर सेंटर या क्रेच (या कोई अन्य व्यवस्था) उपलब्ध है तो बच्चे को अपने साथ ले जाएं।

      यदि यह भी संभव नहीं है, तो काम में जाने से पहले और वापस आने के बाद स्तनपान करें। अगर बच्चा सो रहा है तो उसे जगाएं । संभव हो तो दोपहर के भोजन के समय घर आने और स्तनपान का प्रयास करें। रात और छुट्टियों के दौरान इसे जारी रखें। जिस समय आप शिशु से दूर हों, उसके लिए दूध निकालकर एक कटोरे में स्टोर रखें।आप को दूध निकलते समय और स्टोर करते समय सफाई का ख्याल रखें। व्यक्त दूध को पलड़ी (बेहतर) या चम्मच से ही पिलाना चाहिए, बोतल से नही।बोतल से दूध पिलाने से संक्रमण का खतरा होता है

      बोतल से दूध पिलाने से संक्रमण का खतरा होता है और निप्पल भ्रम से स्तनपान को सफल होने से रोकता है। चूँकि बोतल से दूध पिलाना स्तनपान या पालड़ी/चम्मच से पीने के विपरीत एक निष्क्रिय प्रक्रिया है। बोतल से दूध पिलाने से बच्चा सुस्त हो जाता है और स्तनपान करने से मना कर सकता है। यह वाहन खरीदने के बाद थोड़ी दूर तक चलना भी हमारे लिए आलसीपन जैसा है।

       स्तन, पालड़ी या चम्मच से दूध पीते समय, शिशु दूध लेने की गति और की मात्रा को नियंत्रित कर सकता है। बोतल से दूध पीते समय जो संभव नहीं। बोतल से अनियंत्रित पीने से उल्टी हो सकती है और दूध फेफड़ों में भी जा सकता है (जिससे निमोनिया हो सकता है)। कई लोग तर्क देंगे कि उन्होंने अपने सभी बच्चों को बोतल से दूध पिलाया है और कोई प्रतिकूल घटना नहीं हुई। लेकिन यह तर्क एक शराबी वाहन चालक के दावा जैसा है जो कहता है कि वह शराब पीकर सुरक्षित वाहन चला सकता है क्योंकि अतीत में कोई दुर्घटना नहीं हुई।

       दूध व्यक्त करना कुछ महिलाओं को अजीब लग सकता है। यह सभी अस्पतालों में व्यापक रूप से प्रचलित है, जब शिशु स्तन से सीधे दूध पीने के लिए कमजोर होते हैं। आप अपने हाथों से दूध व्यक्त कर सकते हैं। लेकिन बाजार में पंप उपलब्ध हैं जो इस प्रक्रिया को और कुशल बनाती हैं। बिजली से चलने वाले पंप और भी कुशल होते हैं, जिनसे कम समय में ज्यादा दूध व्यक्त होते हैं।

सफल स्तनपान में अन्य बाधाएं हो सकती हैं जैसे निप्पल में दर्द या संक्रमण, स्तन में सूजन, गढ़े निप्पल। इन सभी के लिए मेरी सलाह एक डॉक्टर को दिखाना है।

माँ के लिए आहार

      मां को वही स्वस्थ और पौष्टिक आहार लेना चाहिए जो आमतौर पर परिवार के अन्य सदस्य लेते हैं। आपको किसी भी चीज़ से परहेज करने की आवश्यकता नहीं है (हाँ!)। शिशु को पीलिया होने पर आप हल्दी से परहेज न करें। आपकी हल्दी के सेवन से पीलिया नहीं होता। साथ ही, आपको खूब पानी पीना चाहिए। यदि आप शिशु के आहार (जैसे कि नान, लैक्टोजन, सेरेलैक, आदि) पर कुछ पैसे खर्च करने की योजना बना रहे हैं, ये राशि अपने आहार पर खर्च करना समझदारी होगी। इससे दूध का उत्पादन बढ़ेगा।

नीचे बिजली के बिना और बिजली से चलने वाले पंप के लिंक दिए गए हैं।

 

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